भूपेंद्र यादव–बाघ संरक्षण को मिली नई दिशा। वैश्विक बाघ दिवस पर एनटीसीए का इको-टूरिज्म वेबपेज लॉन्च
नई दिल्ली, 29 जुलाई। वैश्विक बाघ दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा आयोजित समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश में बाघों और बाघ अभ्यारण्यों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत में 3,682 बाघ और 58 बाघ अभ्यारण्य हैं, जो देश के सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों का प्रमाण हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री यादव ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल बाघों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण-उन्मुख जीवनशैली अपनाने का संदेश भी देता है। उन्होंने लोगों से प्रकृति के साथ जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एनटीसीए का इको-टूरिज्म वेबपेज लॉन्च किया गया, जिसके माध्यम से देश के सभी बाघ अभ्यारण्यों की आधिकारिक वेबसाइटों, सफारी और आवास बुकिंग की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी। यह पहल जिम्मेदार और टिकाऊ प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण की वास्तविक कहानियां केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनमें वन अधिकारियों, संरक्षणवादियों और स्थानीय समुदायों का अनुभव, समर्पण और पारंपरिक ज्ञान भी शामिल होता है। उन्होंने वन अधिकारियों से अपने अनुभवों को लिखित रूप में साझा करने का आग्रह किया, ताकि बेहतर संरक्षण नीतियों के निर्माण में सहायता मिल सके।
समारोह के दौरान बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वन अधिकारियों और कर्मियों को एनटीसीए पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही दिल्ली-एनसीआर के स्कूली बच्चों द्वारा ‘बाघ बचाओ’ विषय पर बनाई गई चित्रकला, नारा लेखन और मुखौटा प्रतियोगिताओं की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।
कार्यक्रम में बाघ संरक्षण से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण रिपोर्टों का भी विमोचन किया गया, जिनमें सुरक्षा लेखापरीक्षा रिपोर्ट, रीछों के आवास उपयुक्तता अध्ययन, ‘टाइगर्स ऑफ द वर्ल्ड’ तथा ‘द रहमान खेड़ा टाइगर’ जैसी प्रकाशन शामिल हैं।
गौरतलब है कि वैश्विक बाघ दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बाघ संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और बाघों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।













