“ओ री गौरैया” पुस्तक गागर में सागर

नीतीश कुमार / श्री संजय कुमार जी द्वारा रचित ओ री गौरैया पुस्तक गागर में सागर है। इस पुस्तक में 17 चैप्टर हैं और हर चैप्टर 1 से बढ़कर एक। पहले तो मुझे लगा था कि कुछ खास नहीं होगा। लेकिन मंगाते हैं पढ़ते हैं, जो थोड़ा बहुत ही जानने को मिलेगा। लेकिन जितनी गहराई…

नीतीश कुमार / श्री संजय कुमार जी द्वारा रचित ओ री गौरैया पुस्तक गागर में सागर है। इस पुस्तक में 17 चैप्टर हैं और हर चैप्टर 1 से बढ़कर एक। पहले तो मुझे लगा था कि कुछ खास नहीं होगा। लेकिन मंगाते हैं पढ़ते हैं, जो थोड़ा बहुत ही जानने को मिलेगा। लेकिन जितनी गहराई इस पुस्तक में है वह वर्णनातीत है आशातीत है।और ,यह पुस्तक जहां एक तरफ कंप्लीट है। पढ़े लिखे लोगों कम जागरूक लोगों को भी एक बार पढ़ लेने के बाद दावा है।

गोरैया संरक्षण से पक्षी प्रेम से जोड़ ही देगा। जिन साधारण शब्दों को असाधारण रूप से इन्होंने अपने भावनाओं से वाक्य में पिरोया है। वह चलचित्र की भांति स्मृति में बना रहेगा। और, गौरैया के लिए कुछ करने को उकसाता ही रहेगा। अब तक गोरैया से जो व्यक्तिगत प्रेम था वह सामाजिक प्रेम में बदल गया है।

यह इस पुस्तक की मेरे लिए दिन है। संजय सर को बहुत-बहुत बधाई। और, आशा करते हैं देववृक्ष संरक्षण पर भी आप अपना अनुभव साझा करेंगे। मां लक्ष्मी रूपी गौरैया का सच्चा प्रेमी वर्षों का प्रेमी ही अपने अनुभवों को इस तरह शब्दों में व्यक्त कर सकता है। बात विद्वता की नहीं भक्ति और प्रेम रस की है। यह मुझे खास बात लगी इस पुस्तक में । लेकिन, जो एक कमी रह गई और जो मुझे खींचती है। पुस्तक थोड़ी महंगी है। और, जिस तरह इस पुस्तक को गांव घर में अल्प शिक्षित अल्प आय वाले लोगों के हाथ में होनी चाहिए ,तो इसको कीमत ₹100 के भीतर रहती तो ज्यादा अच्छा रहता। ज्यादा लोगों तक पहुंचती और गौरैया का समाज का मानव का जीवन का सबका भला हो पाता। मेरी इच्छा इस पुस्तक को निशुल्क बांटने की थी। लेकिन, इस महंगाई में अब संभव नहीं हो पाएगा। हमलोगों का चिड़ियों पर काम करने का 2018 से अनुभव है, लेकिन काफी कच्चा है। हम लोग 2008 से देववृक्ष स्थापना के माध्यम से 3600 से ज्यादा पीपल बरगद देववृक्ष स्थापना कार्यक्रम में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन, बच्चों की महिलाओं की अपील पर गौरैया संरक्षण से भी जोड़ना जुड़ना हुआ और उसमें घर-घर लगाव देखकर और ज्यादा ही हम लोग जुड़ते चले गए। लेकिन, बिना मार्गदर्शन के कार्य काफी दुष्कर हो जाता है गॉडफादर होना चाहिए। राजीव पांडे जी नालंदा से मार्गदर्शन मिला। कार्यक्रम थोड़ा आगे बढ़ा। टीम Rejuvenate Ganga जैसी प्रतिष्ठित संस्था ने sparrow village shivkund गांव को गोद ले लिया। शिवकुण्ड में 350 तथा मुंगेर,माधोपुर में 50घोंसले लग चुके है और आगे लग रहा है।

आपका ही

नीतीश कुमार 7004350772

*”ओ री गौरैया: पुस्तक पर फेसबुक पोस्ट जिसे यहाँ हुबहू दिया जा रहा है

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन