संजय कुमार / इन नवंबर से अगस्त तक घरेलू गौरैया सृजन में जुटी रहती है। आवासीय संकट को देखते हुये इनके लिए बॉक्स यानि कृत्रिम घोंसला लगाएँ और इनका संरक्षण करें। गौरैया जैसे-तैसे घोंसला बनाती है। जब अंडे देने का समय आता है, गौरैया इंसान के घरों या आसपास में घोंसला बनाने में जुट जाती है। जगह का मुआइना करने के बाद ही यह घोंसला बनाती है। ज्यादातर खोह या वैसे जगह पर घोंसला बनाती है जहाँ कौआ-चील-बाज जैसे हमलावर पक्षी की पहुंच नहीं हो, और उसमें केवल वही प्रवेश कर पाये। अमूमन नवंबर माह से जोड़ा बनाने के साथ ही अंडे देने के लिए घोंसला बनाने लगती है।
इंसान के घर इसके लिए बेहतर होता है। इंसान भी अपने घरों में गौरैया के आने और घोंसला बनाने को शुभ मानता है। गौरैया, इंसान के घर के अंदर प्रवेश कर वेंटीलेशन, पंखा में लगे कैप, बाथरूम का पाइप, विंडो एसी के नीचे या खोह में यह घास-फूस-तिनका को ला कर रख देती है। जो काफी हल्के और मुलायम होते हैं। गांव में फूस का घर इनका बेहतर जगह है। शहरों में ये दूकान और मोटर गैरेज के शटर के ऊपर या अंदर घास-फूस-तिनका रख घोंसला बना लेती है।
खपरैल का घर इनके रहने के लिए बहुत सुरक्षित होता है क्योंकि इसमें बड़ें हमलावर पक्षी का खतरा नहीं होता है। केवल सांप और बिल्ली से खतरा होता है । सांप खपरैल में प्रवेश कर अण्डे को या बच्चे को खा जाता है। बिल्ली भी कभी-कभी झपटा मारती है लेकिन जब मादा अंदर रहती है तो नर बाहर रह कर रखवाली करता है। यानी दोनों अंडे या बच्चे की रखवाली करते हैं। इसलिए ये इंसान के घर और उसकी नज़र के सामने रहती है इंसान भी इससे प्रेम करता है और इसके ऊपर हमले के दौरान सुरक्षा देता है।
पिछले कुछ सालों में शहरों में गौरैया की कम होती संख्या पर चिन्ता प्रकट की जा रही है। आधुनिक होते जीवन और बहुमंजिली इमारतों में गौरैया को रहने के लिए पुराने घरों की तरह जगह नहीं मिल पाती है। तो वहीँ सुपर मार्केट संस्कृति के कारण पुरानी पंसारी की दूकानें घटती जा रही हैं। इससे गौरेया को रहने को जगह और दाना नहीं मिल पाता है। शहरों में वेंटीलेशन या आवासीय कमी की वजह से गौरैया संरक्षण में लगे लोग, लोगों को बॉक्स लगाने की सलाह देते हैं। बॉक्स में भी गौरैया आती है और घोंसला बनाती है।
गौरैया के घोंसला में कोई तकनीक नहीं होता है। बस सुरक्षित जगह देख यह घास-फूस-कोमल पत्ते लाकर रख घोंसला बना लेती है। घोंसला बन जाने के बाद उसमें अंडे देती है। बच्चे के निकलने और उसके उड़ने तक गौरैया जोड़ा एक-एक कर घोसला के पास हमेशा रहते है। एक बार जब बच्चे निकल जाये तो दूबारा अंडे देने के लिए घोंसला के उपर फिर से घास-फूस डाल कर घोंसला को ठीक – ठाक कर नया बना देते है।
रूठी गौरैया का आवास छीन हमने खुद से उसे दूर कर दिया है ऐसे में हमें ही पहल करनी होगी और उसे वापस बुलाने के लिए आवासीय व्यवस्था देनी होगी। घर-आँगन-बालकोनी-छज्जे के नीचे बॉक्स लगाना होगा या फिर उसके आवास के लिए घरों में सुराख/खोह बनाना होगा। रोहतास के अर्जुन सिंह ने अपने घर की दीवार पर सैकड़ों छेद करवा दिया है जहां हजारों गौरैया रहती है वहीं बिहार सहित देश भर में लोगों ने अपने अपने घरों में लकड़ी, फ्लाई, मिट्टी और गत्ते का घर लगाया है जहां गौरैया रहती है। अमूमन अंडे देने के लिए गौरैया को आवास यानि घोंसला की जरूरत पड़ती हैं। आप अपने घरों में लकड़ी, फ्लाई, मिट्टी और गत्ते का बॉक्स लगा सकते हैं। अगर लकड़ी, फ्लाई, मिट्टी आदि के बॉक्स में परेशानी हो तो जूते का बॉक्स या कोई भी डब्बा प्लास्टिक छोड़ कर लगा दें। बॉक्स सुरक्षित स्थान पर लगाए, जहां कौआ, बाज, चील जैसे हमलावर पक्षी की पहुँच न हो साथ ही बिल्ली की पहुँच से भी दूर रखें। कोशिश करें बॉक्स को छज्जे के नीचे ऊंचे पर लगा दें या वेंटीलेशन के पास। बॉक्स को पानी-धूप से बचा कर रखें, उसका प्रवेश द्वार सीधे धूप की रोशनी में नहीं रखें। ध्यान रहे बॉक्स में चिड़िया के लिए प्रवेश द्वार का सुराख़ 32 एम एम या दो इंच की गोलाई का हो। ज्यादा बड़ा छेद होने से हमलावर पक्षी को हमला करने में आसानी हो जाएगी वहीं दूसरी चिड़िया घर में आवास बना लेगी और। कुछ लोग घोंसला को पेड़ पर लगा देते हैं जहां बिल्ली और हमलावर पक्षी आसानी से आ जाते हैं। इससे बचने की जरूरत हैं।
इंसानों का घर इनका बसेरा हुआ करता है लेकिन कंक्रीट के जंगलों ने इनके लिए इंसानों के घरों में आवासीय संकट पैदा कर दिया है। आवास की खोज में यह पलायन कर जा रही है। गाँव में भी तेजी से बनते कंक्रीट के मकानों ने गौरैया से उनका बसेरा छीन लिया है। कई गांव से गौरैया के गायब होने का एक कारण यह भी माना जाता है। इतिहास गवाह है कि भी पूरे विश्व में जहाँ-जहाँ मनुष्य गया वहां- वहां गौरैया भी गयी। इंसान जहाँ – जहाँ गया देर सबेर गौरैया के जोड़े वहाँ रहने पहुँच ही जाती हैं। इंसान के घर में ही ये अपना घोंसला बनाते हैं। इसलिए इसे घरेलू गौरैया कहा जाता है। तो आइये पहल करें और बॉक्स लगाएँ।
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