बेंगलुरु : एडविन जोसेफ बेंगलुरु के स्पैरो मैन हैं । और उन्हें उन पक्षियों की याद आती है जो कभी आईटी शहर में हजारों की संख्या में पाए जाते थे। लेकिन अब बहुत कम ही देखे जाते हैं। उन्होंने अपने घर को गौरैया के लिए एक सुरक्षित कोना बना दिया है। वे चाहते हैं कि हर कोई गौरैया की चहचहाहट को सुने और इसके लिए पहल करें।
सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, एडविन ने गौरैयों के लिए टेराकोटा के घोंसले लगाए हैं जिसमें वह रहती है। रोज दाना-पानी गौरैयों को देते हैं। गौरैया संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान से एडविन जोसेफ को बेंगलुरु का स्पैरो मैन कहा जाता है। छोटी चिड़ियाँ गौरैया बेंगलुरु में एक दुर्लभ पक्षी की तरह है। लेकिन एडविन के प्रयास से उनके घर पर हर दिन इनका आना जाना लगा रहता है बल्कि घोंसलों में रहती भी हैं।
एडविन बताते हैं,बचपन के दौरान, बेंगलुरु में बहुत सारी गौरैया को देखता था । शादी के बाद भी, हमारे पास बेडरूम के अंदर एक घोंसला था। हम उन दिनों एक खपरैल वाले घर में रहते थे। लेकिन बेंगलुरु अब कंक्रीट का जंगल बन चुका है, पेड़ काटे जा रहे हैं, झीलें लुप्त हो गई हैं। उनका कहना है कि इन सभी बदलावों ने गौरैया और अन्य जीवों के लिए शहर में प्रवास दुर्गम बना दिया है। पक्षियों के लिए पीने के लिए पानी नहीं है। आहार मुश्किल से मिलता है क्योंकि पेड़ नहीं हैं। पानी नहीं है, जो बहुत महत्वपूर्ण है।
बेंगलुरू के स्पैरो मैन एडविन जोसफ कई सालों से गौरैयों के संरक्षण में लगे हुए हैं । गौरैयों को बचाने के लिए उन्होंने अपने घर पर ही उनके लिए घर बना लिए। बेंगलुरू के बागालुर लेआउट में रहते हैं । एडविन जोसफ़ ने जब परिंदों को चावल के दाने डालना शुरू किया, तब 10-12 परिंदे ही दाना चुगने आते थे । धीरे-धीरे इनकी तादाद बढ़ने लगी और अब सैकड़ों के पार पहुंच चुकी है। एडविन के घर पर मल्टिपल फ़ीडर्स लगे हैं जो बाजरे से भरे रहते हैं । जोसफ़ फ़ीडर्स के पास लकड़ी की तख़्ती लगा हैं ताकि परिंदे शांति से बैठ कर सुस्ता सकें । घर के आस-पास पक्षियों के खेलने के लिए पौधों की कैनोपी बनाई गई है।













