शुभंकर-गौरैया : संरक्षण का देता सन्देश

संजय कुमार/ घर आँगन में चहकने-फुदकने वाली गौरैया भी शुभंकर बन चुकी है। इसके विलुप्त के मद्देनजर बचपन की नन्ही साथी, किसान मित्र, गौरैया का संरक्षण करने के लिए विश्व भर में मुहिम चल रहे हैं। संरक्षण को लेकर 20 मार्च 2010 को घोषित विश्व गौरैया दिवस से लगातार गौरैया संरक्षण से जन भागीदारी के…

संजय कुमार/ घर आँगन में चहकने-फुदकने वाली गौरैया भी शुभंकर बन चुकी है। इसके विलुप्त के मद्देनजर बचपन की नन्ही साथी, किसान मित्र, गौरैया का संरक्षण करने के लिए विश्व भर में मुहिम चल रहे हैं। संरक्षण को लेकर 20 मार्च 2010 को घोषित विश्व गौरैया दिवस से लगातार गौरैया संरक्षण से जन भागीदारी के साथ-साथ सरकारें भी जुड़ चुकी हैं। ‘आई लव स्पैरो’, स्लोगन के साथ-साथ गौरैया ‘शुभंकर’ भी प्रभाव छोड़ रहा है। शुभंकर का प्रयोग, यों तो खेल आयोजनों में देखा जा सकता हैं। लेकिन शुभंकर का प्रयोग जागरूकता और वित्तीय आदि कार्यक्रमों में भी देखा जा रहा है।

केंद्र सरकार ने ‘खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2023’  का शुभंकर ‘उज्ज्वला-एक गौरैया’ बनाया तो वहीँ बिहार सरकार ने राजगीर में वीमेंस एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, 2024 का ‘शुभंकर’ ‘गुड़िया-एक गौरैया’ को बनाया। अखिल भारतीय सिविल सेवा कैरम टूर्नामेंट 2023-24 का शुभंकर भी एक गौरैया बनी नाम दिया गया ‘क्वीन’। जबकि गौरैया संरक्षण में सक्रिय हमारी गौरैया तथा एनवायरनमेंट वारियर्स, पटना, बिहार ने विश्व गौरैया दिवस 2025 के मद्देनजर विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए शुभंकर ‘जुबी-एक गौरैया’ नाम दिया। शुभंकर गौरैया के तौर पर उज्ज्वला, गुडिया, जुबी बनी, तो वहीँ 2022  में अमेरिका की एक वित्तीय संगठन ने स्पैरो फाइनेंशियल नाम दिया। शुभंकर बनाने के पीछे मकसद साफ़ था कि गौरैया संरक्षण का सन्देश दूर-दूर तक जाए और आयोजन को एक खास पहचान भी मिले।

भारत में पहली बार आयोजित होने वाले खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2023 के प्रतीक चिन्ह (लोगो) और शुभंकर ‘उज्ज्वला’-गौरैया को नई दिल्ली में 26 नवम्बर 2023 को तत्कालीन केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और कई प्रतिष्ठित एथलीटों व पैरा एथलीटों द्वारा लॉन्च किया गया था। ‘उज्ज्वला’- एक गौरैया, का अनावरण खेलो इंडिया – पैरा गेम्स 2023 के आधिकारिक शुभंकर के रूप में किया गया। यह छोटी गौरैया दिल्ली के गौरव का प्रतीक है। 15 अगस्त 2012 को दिल्ली सरकार ने गौरैया को राजकीय पक्षी घोषित कर रखा है। गौरैया की विशिष्टता दृढ़ संकल्प एवं सहानुभूति को दर्शाती है। खेलो इंडिया-पैरा गेम्स 2023 के शुभंकर के रूप में उज्ज्वला-एक गौरैया युवा है जो कथई रंग का निकर, केसरिया रंग की टोपी, जर्सी, जूता और गले- कलाई पर तिरंगा पट्टी पहनी है। इसे खेलो इंडिया-पैरा गेम्स 2023 के दौरान खेल परिसर के आलवे दिल्ली के प्रमुख स्थान पर रखा गया था।   उज्ज्वला-एक गौरैया, इस तथ्य की याद दिलाता है कि शक्ति कई रूपों में आती है और मानवीय भावना अटूट है। इस अवसर पर, पूर्व भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल, भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान और ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त, भारतीय पेशेवर पहलवान सरिता मोर और भारतीय पेशेवर मुक्केबाज अखिल कुमार उपस्थित थे।

बिहार सरकार ने भी गौरैया को 16 अप्रैल 2013 में राजकीय पक्षी बनाया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 अक्तूबर 2024 को बिहार में पहली बार 11 से 20 नवंबर 2024 तक राजगीर में आयोजित होने वाली वीमेंस एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, 2024 के ‘लोगो’ डिजाइन और ‘शुभंकर’ का अनावरण ‘गुडिया-एक गौरैया’ से किया। ‘गुडिया-एक गौरैया’ को आकर्षक बनाने के लिए पीले रंग का जूता,जर्सी, नीले रंग की निकर और हाथ में हॉकी स्टीक थमाते एक्शन के साथ महिला खिलाड़ी का स्वरूप दिया गया था। इस प्रतियोगिता में छह देशों- भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और थाईलैंड की महिला हॉकी की टीमें भाग लीं। इस प्रतियोगिता का शुभंकर ‘गुड़िया’ बिहार की राज्य पक्षी गौरैया से प्रेरित है। सभी विजेता खिलाड़ियों शुभंकर ‘गुड़िया’-गौरैया भेंट भी किया गया था। इस प्रतियोगिता के ‘लोगो’ का डिजाइन गौरवशाली बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक ऐतिहासिक विरासत और सर्वांगीण विकास का प्रतीक है।

वहीँ,बिहार खेल सचिवालय फाउंडेशन द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सिविल सेवा कैरम टूर्नामेंट 2023-24 का शुभंकर क्वीन-एक गौरैया को बनाया गया। शुभंकर का डिजाइन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड,पटना के सहयोग से बनवाया गया था। इसे लाल डिस्क (कैरम में सबसे शक्तिशाली टुकड़ा) के नाम पर क्वीन नाम दिया गया है। क्वीन-एक गौरैया शुभंकर को क्वीन की तरह सजाया भी गया।

दूसरी ओर गौरैया संरक्षण में वर्षों से सक्रिय पटना बिहार के ‘हमारी गौरैया तथा एनवायरनमेंट वारियर्स’ ने विश्व गौरैया दिवस 2025 के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए शुभंकर “जुबी”-एक गौरैया का अनावरण पटना में किया। शुभंकर को टोपी, कोट और टाई में दिखया गया है, जो आज के कॉपरेट समाज के सहयोग तथा युवाओं में आत्मविश्वास को प्रदर्शित कर रहा है, पैर में पीला जूता इसे समाज के सतत विकास के साथ आगे बढ़ने और स्फूर्ति को प्रदर्शित करता है तो सर पर हरी टोपी, बच्चे और पर्यावरण संरक्षण से इसे जोड़ता है। सर पर लगे पंख संरक्षण में आने वाली चुनौती के प्रति सजगता को प्रदर्शित करती है।

वहीं, अमेरिका का एक वित्तीय आधारित संगठन है ‘स्पैरो फाइनेंशियल’. जो पारंपरिक क्रेडिट सिस्टम द्वारा हाशिए पर पड़े लोगों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 2022 में अपनी स्थापना के बाद से, स्पैरो फाइनेंशियल तेजी से आगे बढ़ रहा है, एक क्रेडिट कार्ड उत्पाद विकसित कर रहा है जो समावेशिता, न्यूनतम शुल्क और वित्तीय साक्षरता और स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त करता है। शुभंकर के तौर पर गौरैया को चुना गया। शुभंकर ऐप में गौरैया के रेखाचित्रों को रोचकता के साथ लोगों से बातचीत के मुद्रा के साथ बनाया गया है। संगठन का मानना है कि ब्रांड की प्रेरणा और नाम के रूप में गौरैया का चयन, पक्षी के लचीलेपन, समुदाय और जीवन शक्ति के गुणों के साथ ब्रांड के संरेखण को दर्शाता है। ये गुण गौरैया के लक्षित दर्शकों की भावना के साथ गहराई से प्रतिध्वनित होते हैं, जिससे गौरैया ब्रांड के मिशन के लिए एक आदर्श

प्रतीक बन जाती है। स्पैरो कार्ड ऐप को स्पैरो कार्डधारक की वित्तीय सशक्तीकरण और बेहतर ऋण की दिशा में यात्रा को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। स्पैरो के लिए, शुभंकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  गौरैया के चेहरे के रूप में कार्य करते हुए, शुभंकर ब्रांड को एक अद्वितीय, सुलभ व्यक्तित्व प्रदान करता है। शुभंकर ऐप के दृश्य कथानक को आधार प्रदान करता है, तथा एक सुसंगत और विसर्जित करने वाला उपयोगकर्ता अनुभव निर्मित करता है। स्पैरो के शुभंकर के लिए रंग पैलेट उसके पक्षी नाम के प्राकृतिक रंगों से लिया गया है, जिससे दृश्य अनुभव सुखदायक और सौंदर्यपरक दोनों है, तथा यह स्पैरो ऐप के उपयोगकर्ता इंटरफेस के साथ पूरी तरह से मेल खाता है।

बहरहाल, गौरैया को शुभंकर बना कर गौरैया संरक्षण का जो सन्देश देने का काम हो रहा है वह काबीले तारीफ इसलिए हैं कि ये लोगों को अपनी ओर खींच पाने में सफल होते हैं, खासकर बच्चे और युवाओं को।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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