जुगनू देख खिल खिला उठे बच्चों के चेहरे

पटना 6 जुलाई 2026 / विश्व जुगनू दिवस पर एनवायरमेंट वॉरियर्स तथा हमारी गौरैया का संयुक्त तत्वाधान में दक्षिणी पटना के क्षेत्र में जुगनू वॉक का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों के साथ माता-पिता ने भी भाग लिया। जुगनू को देख बच्चों के चेहरे खिल उठे,बच्चों ने पहली बार किसी पतिंगे यानि जुगनू को…


पटना 6 जुलाई 2026 / विश्व जुगनू दिवस पर एनवायरमेंट वॉरियर्स तथा हमारी गौरैया का संयुक्त तत्वाधान में दक्षिणी पटना के क्षेत्र में जुगनू वॉक का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों के साथ माता-पिता ने भी भाग लिया। जुगनू को देख बच्चों के चेहरे खिल उठे,बच्चों ने पहली बार किसी पतिंगे यानि जुगनू को टिमटिमाते हुए अँधेरे में प्रकाश करते देखा । यह उनके लिए रोमांच से कम नहीं था ।

एनवायरमेंट वॉरियर्स के निदेशक निशांत रंजन ने बताया कि प्रत्येक वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताहांत में विश्व जुगनू दिवस पूरे दुनिया में धूमधाम से मनाया जाता है। जुगनू हमारी संस्कृति, लोक-कथाओं, कविताओं तथा साहित्य में आशा, प्रकृति की सुंदरता, अंधकार में प्रकाश के प्रतीक के रूप में जाना जाता है लेकिन इसका पर्यावरणीय महत्व महत्वपूर्ण है। यह स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र मुख्य संकेतक हैं। ये मुख्य रूप से उन्हें स्थान पर पाये जाते है, जहां पर स्वच्छ एवं प्रदूषण रहित वातावरण हो, इसके अलावे इसका मुख्य कार्य कीट नियंत्रण करना होता है। जुगनुओं के शरीर में प्रकाश उत्पन्न करने की प्रक्रिया, जिसे जैवदीप्ति कहा जाता है, का उपयोग अपने साथी को आकर्षित करने एवं एक दूसरे को संकेत देने के लिए करते है,लेकिन आज के दौर में बढ़ते प्रकाशीय प्रदूषण, कीटनाशकों का प्रयोग एवं समेटते प्राकृतिक अधिवास के कारण यह तेजी से विलुप्त हो रहा है। आज हमारे द्वारा आयोजित इस वॉक में कोई ऐसे बच्चे थे जिन्होंने पहली बार जुगनू देखा है। कार्यक्रम में शानू कुमार राज, सभ्यता कुमारी, निश्चल कुमार, चंदन कुमार, अनामिका कुमारी सहित 30 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन