संजय कुमार / गौरैया पक्षी प्रजनन के मौसम में जोड़ी में रहते है, हालाँकि ये अक्सर सामूहिक रूप से रहना पसंद करते हैं। गौरैया नियम में बंधी रहती है- प्यार जोड़ी में, और जिंदगी झुण्ड में। नवम्बर से गौरैया जोड़ा बनने लगता है। जोड़ा बनते ही हमेशा साथ-साथ रहना होता है, अगर मादा कही दाना चुगने चली जाए और जल्द नहीं लौटे तो नर घोंसला या एक स्थान,जहाँ वे मिलते हैं वहां से मादा को आवाज देकर बुलाने लगता हैं। मादा के आते ही खुश हो जाता है और नृत्य करने लगता है। जोड़ा गौरैया जब साथ रहते तब कोई दूसरा नर या मादा गौरैया आ जाये तो उसे भगा देते हैं। जब साथ रहते या प्रेम करते तो खलल उन्हें पसंद नहीं होता।
मार्च से अगस्त प्रजनन का मौसम होता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन से माह आगे पीछे होता है। इस समय नर और मादा एक जोड़ी बना लेते हैं। एक ही साथी के साथ रहते हैं, उसी के साथ मिलकर घोंसला बनाते हैं। मादा जब अंडे दे देती है तब दोनों मिलकर अंडे को सेते हैं। अंड्डे से चूचे निकलते ही दोनों मिलकर उसे पलने लगते हैं आहार में कीड़े खिलाते हैं। जब एक आहार की तलाश में बाहर जाता दूसरा घोंसले के अंदर या बाहर रह कर बच्चे की सुरक्षा करता है। जैसे ही बच्चे बड़े हुए, फिर से सब एक साथ दाना चुगने -पानी में झुण्ड मिल जाते हैं।
दोनों एक दूसरे के प्रति बहुत वफादार होते हैं। जोड़ा बनाने से लेकर उसे बड़ा करने तक दोनों हमेशा साथ रहते है। अगर एक मर जाए तभी दूसरा नया साथी ढूंढता है।















