एक मौसम में गौरैया के कई बार होते हैं  बच्चे

संजय कुमार/ गौरैया उड़ते हुए, आंखों में अजीब चमक लिए छोटे अन्तराल, यानि 5, 10 या  20 सेकेंड के कई अन्तराल में मेटिंग करता हैं। यह अन्तराल वैज्ञानिक रूप से या तय समय में नहीं होता यह सब गौरैया के मूड पर निर्भर होता है। अंडो से चूजे बाहर आने के तुरंत बाद प्रजनन के…

संजय कुमार/ गौरैया उड़ते हुए, आंखों में अजीब चमक लिए छोटे अन्तराल, यानि 5, 10 या  20 सेकेंड के कई अन्तराल में मेटिंग करता हैं। यह अन्तराल वैज्ञानिक रूप से या तय समय में नहीं होता यह सब गौरैया के मूड पर निर्भर होता है। अंडो से चूजे बाहर आने के तुरंत बाद प्रजनन के मौसम में गौरैया पुनः प्रजनन के लिए तैयार हो जाती हैं। इसलिए इनके बच्चे  कई चक्र में होते हैं।

गौरैया एक मौसम में कई बार देती है बच्चे

घरेलू गौरैया सामान्यतः अनुकूल परिस्थितियों में एक ही प्रजनन मौसम में कई बार प्रजनन कर सकती है। इसका कारण यह है कि गौरैया का प्रजनन चक्र अपेक्षाकृत छोटा होता है। मादा अंडे देने के बाद उन्हें सेती है और अंडों से चूजे निकलने के बाद माता-पिता दोनों उन्हें भोजन उपलब्ध कराने में जुट जाते हैं। चूजों के घोंसले से निकलने के बाद भी अनुकूल परिस्थितियां बनी रहें तो जोड़ा दोबारा प्रजनन की तैयारी करता है।

एक सामान्य प्रजनन क्रम में मिलन करना,घोंसला बनाना, अंडे देना, अंडों का ऊष्मायन, चूजों का निकलना और उनका पालन-पोषण शामिल होता है। घरेलू गौरैया प्रायः एक बार में 3 से 5 अंडे देती है। अंडों को सेने की अवधि लगभग दो सप्ताह के आसपास होती है और चूजे निकलने के बाद कुछ समय तक पूरी तरह माता-पिता पर निर्भर रहते हैं। दोबारा प्रजनन मौसम, भोजन, घोंसले की उपलब्धता, तापमान और स्थानीय पर्यावरण पर निर्भर करती है।

प्रजनन काल में नर गौरैया मादा को आकर्षित करने के लिए उसके आसपास फुदकता है, आवाजें निकालता है और अपने पंखों को नीचे कर मादा के आसपास नृत्य कर शरीर की मुद्राओं से आकर्षित करने का प्रयास करता है। कई बार नर और मादा के बीच मिलन  बहुत कम समय में पूरा हो जाता है। वैसे मिलन अवधि परिस्थितियों और व्यवहार के अनुसार बदल सकती है। मिलन (मैथुन) के बाद भी प्रजनन प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। मादा घोंसले में अंडे देती है और फिर अंडों को सेने तथा बाद में चूजों को पालने की प्रक्रिया शुरू होती है।

चूजों के बाद फिर शुरू होता है नया चक्र

गौरैया की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक उसका दोबारा प्रजनन करने की क्षमता है। जब पहला समूह घोंसले से बाहर आने लगता है और माता-पिता पर उनकी निर्भरता कम होने लगती है, तब अनुकूल परिस्थितियों में गौरैया का जोड़ा फिर से प्रजनन कर सकता है। यही कारण है कि किसी क्षेत्र में गौरैयों के छोटे-छोटे बच्चे अलग-अलग समय पर दिखाई दे हैं।

गौरैया का प्रजनन जीवन प्रकृति की तेज गति का अद्भुत उदाहरण है। अनुकूल मौसम, पर्याप्त भोजन और सुरक्षित घोंसला मिलने पर यह नन्ही चिड़िया गौरैया एक ही प्रजनन मौसम में कई बार परिवार बढ़ाती है। एक समूह के चूजे घोंसले से निकलकर उड़ान सीख रहे होते हैं और कुछ समय बाद वही जोड़ा फिर नए घोंसले और अगले प्रजनन चक्र की ओर बढ़ता दिखता है। इसी वजह से गौरैया के बच्चे एक साथ नहीं, बल्कि मौसम के अलग-अलग दौर में कई समूहों में दिखाई देते हैं।

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 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

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उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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