संजय कुमार / घरेलू गौरैया कई तरह की जगहों पर घोंसला बनाती हैं, हालाँकि वह इमारतों और इंसानों द्वारा बनाई गई दूसरी संरचनाओं में बनी खाली जगहों को ज़्यादा पसंद करती हैं। ये घोंसलों के लिए कृत्रिम बक्सों का भी इस्तेमाल करते हैं। घरेलू गौरैया अक्सर लोगों के आस-पास घोंसला बनाती हैं। वे अक्सर ऐसी जगह घोंसला बनाती हैं जो आसानी से दिखाई न दे, लेकिन आप पक्षियों को देखकर और घोंसले वाली जगह से लटकती हुई घोंसला बनाने की ढीली सामग्री पुआल.फूस,धागा ,तिनका आदि को देख/ ढूँढकर उनका पता लगा सकते हैं।
घोंसले की जगह चुनने के मामले में घरेलू गौरैया बहुत आसानी से ढलने वाली होती हैं। प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरह की संरचनाओं में घोंसला बनाने की उनकी क्षमता से इस प्रजाति के विस्तार में मदद मिली है। वे छेद और दरारों जैसी बंद जगहों पर घोंसला बनाना पसंद करती हैं, लेकिन वे घनी वनस्पतियों में भी अपना घोंसला बना लेती हैं। घर और इमारतें गटर, छत, वेंट और दूसरी सुरक्षित जगहों के रूप में घोंसला बनाने के कई मौके देती हैं। ये पक्षी स्थानीय प्रजातियों के लिए रखे गए घोंसले के बक्सों का भी आसानी से इस्तेमाल करते हैं।
घरेलू गौरैया अक्सर अपने घोंसलों का दोबारा इस्तेमाल करती हैं। वे ऐसा इसलिए कर पाती हैं क्योंकि वे आमतौर पर खोखली जगहों और सुरक्षित ठिकानों पर घोंसले बनाती हैं। वे एक ही ब्रीडिंग सीज़न में हर बार बच्चों के लिए उसी घोंसले का इस्तेमाल करती हैं, और बाद के ब्रीडिंग सीज़न में भी उसी घोंसले का इस्तेमाल कर सकती हैं।
घरेलू गौरैया आमतौर पर पेड़ों पर घोंसला नहीं बनातीं, हालांकि वे घनी पत्तियों वाले शंकुधारी पेड़ों का इस्तेमाल कर सकती हैं। आसानी से ढल जाने वाली ये चिड़िया इमारतों की दीवारों पर चढ़ने वाली बेलों में भी घोंसले बनाती हैं। घरेलू गौरैया के घोंसले का आकार कोई खास या अनोखा नहीं होता, लेकिन आप आमतौर पर उनकी जगह और ब्रीडिंग करने वाले पक्षियों को देखकर उन्हें पहचान सकते हैं।
घोंसला मुख्य रूप से सूखे पौधों के हिस्सों से बनता है, लेकिन इसमें पंख, धागे, कागज, पुआल ,तिनका और दूसरी चीजें भी शामिल होती हैं। हाउस स्पैरो आराम और गर्मी बनाए रखने के लिए घोंसले के अंदर नरम चीजों का इस्तेमाल करती हैं। तीन ग्राम वजन की गौरैया अपना पूरा संसार सिर्फ 4 इंच के एक कोने में बसा लेती। कंक्रीट के जंगल में गौरैया ने जुगाड़ सीख लिया है। एसी के नीचे, बिजली पोल पर लगे बॉक्स, शटर,पाईप,बिजली का मीटर बॉक्स आदि। गौरैया पेड़ की खुली डाल पर घोंसला नहीं बनाती। उसे बंद जगह चाहिए।
गौरैया की सबसे बड़ी खासियत है वो अपना घोसला तोड़ती नहीं। एक ही ब्रीडिंग सीजन में 3-4 बार अंडे देती है और हर बार उसी घोंसले में। अगले साल भी उसी घोंसले को रिपेयर करके इस्तेमाल कर लेती है। क्योंकि जगह सुरक्षित है, बार-बार नया घर बनाने की जरूरत नहीं। इसीलिए अगर आपने एक बार कृत्रिम घोंसला लगा दिया, तो 3-4 साल तक उसी में गौरैया आती रहेगी।
आज गौरैया के घोंसले खत्म हो रहे हैं क्योंकि बंद फ्लैट, बिल्डिंग में जाली, सील एसी, खोह ही नहीं बची। वही कुछ लोग घोंसला को तोड़ देते हैं। उन्हें लगता है कि वे गंदगी फैलाएंगी और फ्लैट/ बिल्डिंग गन्देदा होगा और देखने में सुंदर नहीं लगेगा।
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