बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर पर खतरा मंडराने लगा है। यहां आसपास खनन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जुलाई के बाद से महज दो महीनों में चौथी कोयला परियोजना को मंजूरी मिली है। इनमें एक खदान कॉरिडोर से सिर्फ 53 मीटर दूर है। बाघों की आवाजाही और जैव विविधता के लिए अहम इस कॉरिडोर के आसपास बढ़ती खनन गतिविधियों ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है..मीडिया रिपोर्ट को देखें तो इस खबर को मीडिया ने प्राथमिकता से उठाया है।
उमरिया/बांधवगढ़। बांधवगढ़ से अचानकमार तक बाघों की आवाजाही वाले महत्वपूर्ण प्राकृतिक गलियारे के आसपास कोयला खनन परियोजनाओं को लगातार मिल रही मंजूरियों ने वन्यजीव संरक्षण पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस पहल से पर्यावरण प्रेमी और वन्यजीव विशेषज्ञ बेहद निराश और चिंतित हैं।
दरअसल, जुलाई 2026 के बाद से इस संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर के इर्द-गिर्द यह चौथी कोयला परियोजना है जिसे पर्यावरणीय मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक परियोजना कॉरिडोर से महज 53 मीटर की दूरी पर स्थित है।ताजा मामला ‘वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन’ का है, जो कॉरिडोर से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर प्रस्तावित है।
विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की 8 और 9 सितंबर को हुई बैठक में इस परियोजना को कुछ शर्तों और दस्तावेजों की पूर्ति के आधार पर पर्यावरणीय मंजूरी देने की सिफारिश कर दी गई।
दूरी ही बढ़ा रही है चिंता:
कुछ ही महीनों में कॉरिडोर के आसपास चार खनन प्रोजेक्ट का आना बड़े औद्योगिक दबाव का संकेत है
-मरावतोला VII कोल ब्लॉक – मात्र 53 मीटर
-पथोरा ईस्ट अंडरग्राउंड ब्लॉक – 1.5 किमी
-अर्जुनी वेस्ट कोल ब्लॉक – 3.9 किमी
-वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) – 6 किमी
1400 हेक्टेयर का खनन पट्टा, 960 हेक्टेयर वनभूमि दांव पर:
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जेके सीमेंट लिमिटेड से जुड़ी इस नई परियोजना का कुल खनन पट्टा क्षेत्र 1,400 हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें 960 हेक्टेयर से ज्यादा वनभूमि शामिल है। कंपनी का दावा है कि भूमिगत खनन होने से सीधे तौर पर सिर्फ 19 हेक्टेयर वनभूमि प्रभावित होगी।हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भूमिगत खनन में जमीन धंसने (Subsidence) का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे सतह की बनावट, आर्द्रभूमि, जलस्रोत और जंगलों के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक प्रतिकूल असर पड़ सकता है।बांधवगढ़-अचानकमार कॉरिडोर मध्य भारत के बाघों के लिए आनुवंशिक संपर्क की जीवनरेखा है। ऐसे में कॉरिडोर के इतने करीब खनन गतिविधियों को अनुमति मिलना बाघों की दीर्घकालिक आबादी के लिए खतरे की घंटी है।
(मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित,फोटो ai)















