पर्यावरणीय मानकों के गंभीर उल्लंघन के मामले में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की बड़ी कार्रवाई

पटना। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पर्यावरणीय मानकों के गंभीर उल्लंघन के मामले में दरभंगा और पटना स्थित दो औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। दोनों इकाइयों में बहिःस्राव उपचार संयंत्र (ईटीपी) ठीक से संचालित नहीं पाए गए और अनुपचारित बहिःस्राव को बाहर निकालने के मामले सामने आए हैं। पर्षद द्वारा जल…

पटना। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पर्यावरणीय मानकों के गंभीर उल्लंघन के मामले में दरभंगा और पटना स्थित दो औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। दोनों इकाइयों में बहिःस्राव उपचार संयंत्र (ईटीपी) ठीक से संचालित नहीं पाए गए और अनुपचारित बहिःस्राव को बाहर निकालने के मामले सामने आए हैं। पर्षद द्वारा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत दोनों इकाइयों को बंद करने की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) वाला बहिःस्राव छोड़ने वाले अथवा परिसंकटमय पदार्थों का संचालन करने वाले उद्योगों को अतिप्रदूषणकारी उद्योगों की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे उद्योगों का प्रत्येक वर्ष राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और तकनीकी विशेषज्ञ संस्थाओं की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण किया जाता है। इसके लिए आईआईटी, एनआईटी, राष्ट्रीय शुगर संस्थान और अन्य विशेषज्ञ तकनीकी संस्थाओं में से किसी एक संस्था का चयन किया जाता है।

दरभंगा की डेयरी इकाई में बोरवेल में रिवर्स पंपिंग

इसी क्रम में इस वर्ष राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और आईआईटी खड़गपुर की संयुक्त टीम ने दरभंगा स्थित मेसर्स मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की इकाई का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बहिःस्राव उपचार संयंत्र ठीक से संचालित नहीं पाया गया। इसके अलावा अनुपचारित बहिःस्राव को बाईपास कर बोरवेल में रिवर्स पंपिंग किए जाने की बात सामने आई।

पर्षद के अनुसार यह गंभीर श्रेणी का उल्लंघन है। इसे इकाई को दी गई सहमति की शर्तों का गैर-अनुपालन तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया है। पर्षद का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने अधिनियम के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इकाई को बंद करने की आवश्यक कार्रवाई शुरू की है।

पटना की इकाई में नाले में छोड़ा जा रहा था बहिःस्राव

इसी तरह पर्षद और आईआईटी खड़गपुर की संयुक्त टीम ने पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र, पटना स्थित मेसर्स हरिलाल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की इकाई का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वहां बहिःस्राव उपचार संयंत्र संचालित नहीं पाया गया।

पर्षद के अनुसार इकाई से अनुपचारित बहिःस्राव का बाईपास किया जा रहा था और इसे निकटवर्ती नाले में छोड़ा जा रहा था। इसे भी गंभीर गैर-अनुपालन और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन माना गया है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने इस इकाई के खिलाफ भी जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की सुसंगत धाराओं के तहत बंदी की आवश्यक कार्रवाई शुरू की है। पर्षद का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य अनुपचारित औद्योगिक बहिःस्राव से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को रोकना है।

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 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

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उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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