प्रदूषण पर सीएक्यूएम की सख्ती कई उल्लंघन पकड़े

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रवर्तन कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया है। आयोग के प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की 138वीं बैठक में 8 से 23 अगस्त 2026 के बीच एनसीआर में किए गए निरीक्षणों, अनुपालन की स्थिति और उल्लंघन के…

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रवर्तन कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया है। आयोग के प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की 138वीं बैठक में 8 से 23 अगस्त 2026 के बीच एनसीआर में किए गए निरीक्षणों, अनुपालन की स्थिति और उल्लंघन के मामलों की समीक्षा की गई।

31 अगस्त को हुई बैठक में बताया गया कि इस 16 दिन की अवधि में आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड ने एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों में 121 निरीक्षण किए। इनमें निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) स्थलों के 10, औद्योगिक इकाइयों के 56 और डीजल जनरेटर (डीजी) सेट से जुड़े 20 निरीक्षण शामिल हैं। अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया गया। निरीक्षणों में सामने आए उल्लंघनों के आधार पर चार परियोजनाओं/औद्योगिक इकाइयों को बंद करने, 17 डीजी सेट सील करने, सात अनुपालन आदेश या निर्देश जारी करने तथा पांच मामलों में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने का प्रस्ताव किया गया है।

28 हजार से अधिक इकाइयों का निरीक्षण

बैठक में 31 अगस्त तक की समग्र प्रवर्तन स्थिति की भी समीक्षा की गई। इसके अनुसार, सीएक्यूएम के फ्लाइंग स्क्वाड अब तक एनसीआर में 28,397 इकाइयों, परियोजनाओं और संस्थाओं का निरीक्षण कर चुके हैं। इन निरीक्षणों के आधार पर 1,823 बंदी आदेश जारी किए गए। अनुपालन की पुष्टि के बाद इनमें से 1,473 इकाइयों एवं परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा, 126 मामलों को अंतिम निर्णय के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को भेजा गया है, जबकि 224 संस्थाओं के संबंध में पुनः संचालन की अनुमति देने से पहले जांच जारी है।

नौ संस्थाओं को मिली पुनः संचालन की अनुमति

ईटीएफ की पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की अनुपालन स्थिति की समीक्षा में पाया गया कि औद्योगिक क्षेत्र, निर्माण एवं विकास गतिविधियों और डीजी सेट से जुड़े सभी कार्रवाई योग्य मामलों में आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं। अनुपालन सत्यापन के बाद नौ पुनः आरंभ आदेश जारी किए गए। इनमें दो औद्योगिक इकाइयां और सात निर्माण एवं विकास परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें दिल्ली की एक, हरियाणा की छह और उत्तर प्रदेश की दो इकाइयां या परियोजनाएं शामिल हैं।

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर नजर

सीएक्यूएम ने एनसीआर में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत बताई। आयोग ने कहा कि नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ अनुपालन का समयबद्ध सत्यापन और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।आयोग ने औद्योगिक इकाइयों, निर्माण एवं विकास गतिविधियों, डीजी सेट तथा सड़क निर्माण कार्यों जैसे प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई जारी रखने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य एनसीआर में वायु प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है ।(PIB)

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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