गौरैया देती है 2 से 5 अंडे , 10-14 दिन में निकलते हैं बच्चे

संजय कुमार / घरेलू गौरैया (House Sparrow, वैज्ञानिक नाम Passer domesticus) आमतौर पर घोंसले में 2 से 5 अंडे देती है। परिस्थितियों और भोजन की उपलब्धता के अनुसार इनकी संख्या कुछ कम या अधिक भी हो सकती है। अंडे से चूजे तक : अंडे से निकलने के बाद गौरैया के चूजे बहुत असहाय होते हैं।…

संजय कुमार / घरेलू गौरैया (House Sparrow, वैज्ञानिक नाम Passer domesticus) आमतौर पर घोंसले में 2 से 5 अंडे देती है। परिस्थितियों और भोजन की उपलब्धता के अनुसार इनकी संख्या कुछ कम या अधिक भी हो सकती है।

  • अंडों का रंग: सफेद, धूसर-सफेद या हल्का नीला-सफेद हो सकता है। इन पर भूरे, लाल-भूरे या धूसर धब्बे पाए जाते हैं।
  • आकार: अंडे छोटे और अंडाकार होते हैं, सामान्यतः करीब लंबाई 20 से 22 मिमी और चौड़ाई 14 से 16 मिमी होती है। अंडे का औसत द्रव्यमान 2.9 ग्राम होता है।
  • अंडे देने का अंतर: मादा अक्सर लगभग एक-एक दिन के अंतर पर अंडे देती है।
  • सेने की अवधि: अंडों से बच्चे निकलने में सामान्यतः 10 से 14 दिन लगते हैं।
  • कौन अंडे सेता है: नर और मादा दोनों अंडों को सेने काम करते हैं, हालांकि मादा की भूमिका अधिक होती है।
  • एक से अधिक बार प्रजनन: अनुकूल परिस्थितियों में गौरैया एक प्रजनन मौसम में एक से अधिक बार अंडे दे सकती है।
  • सभी अंडों से बच्चे निकलना जरूरी नहीं: कभी-कभी कोई अंडा निषेचित नहीं होता या भ्रूण का विकास रुक जाता है। इसलिए घोंसले में रखे सभी अंडों से चूजे निकलें, यह जरूरी नहीं है।
  • अंडे को खतरा : गौरैया के अंडे को सांप,बिल्ली,कौआ आदि से खतरा होता है।
  • गौरैया वर्ष में एक बार ही एक प्रजनन करती है।

अंडे से चूजे तक : अंडे से निकलने के बाद गौरैया के चूजे बहुत असहाय होते हैं। उनके शरीर पर शुरुआती दिनों में बहुत कम पंख होते हैं और वे भोजन के लिए पूरी तरह माता-पिता पर निर्भर रहते हैं। नर-मादा दोनों मिलकर चूजों के लिए भोजन लाते हैं। भोजन में कीड़े होते हैं। सामान्यतः लगभग दो सप्ताह के आसपास चूजे घोंसले से बाहर निकलने की स्थिति में आने लगते हैं, हालांकि पूरी तरह स्वतंत्र होने में और समय लगता है।

अहम् बात: यदि किसी घोंसले में गौरैया के अंडे दिखाई दें तो उसकी तस्वीर लेना, छूना, स्थान बदलना या घोंसला खोलकर देखना उचित नहीं है। मानव हस्तक्षेप से पक्षी घोंसला छोड़ सकते हैं। अगर आप शोध कर रहे हैं तो टेलीलेंस से नजर रख सकते हैं।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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