केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया उद्घाटन, राष्ट्रीय पोर्टल भी लॉन्च; सह-अस्तित्व को बताया पारिस्थितिक स्थिरता का आधार
कोयंबटूर, 10 जुलाई: मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने के उद्देश्य से केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कोयंबटूर स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान-सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष पर एक राष्ट्रीय पोर्टल भी लॉन्च किया।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पर्यावासों के विखंडन, भूमि उपयोग में बदलाव और बढ़ती मानवीय गतिविधियों के कारण मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ रहा है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष देश की प्रमुख संरक्षण चुनौतियों में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता समस्या पर नहीं, बल्कि समाधान पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 7वीं बैठक में की गई घोषणा के अनुरूप स्थापित यह उत्कृष्टता केंद्र मानव-वन्यजीव संघर्ष के वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान, नवाचार, नीति निर्माण, क्षमता विकास और सर्वोत्तम उपायों के प्रसार का केंद्र बनेगा।
केन्नेद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र को बाघ अभयारण्यों के बाहर बाघों, तेंदुओं और हाथियों के साथ होने वाले संघर्षों के प्रबंधन के लिए प्रभावी रणनीतियां विकसित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों में वन्यजीवों के प्रति भय को कम किया जा सकता है और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने वन विभागों से मानव बस्तियों और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी, बहु-हितधारक सहयोग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से ही स्थायी समाधान संभव हैं।
‘संघर्ष नहीं, सह-अस्तित्व जरूरी’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा, “संघर्ष के बजाय सह-अस्तित्व और सद्भाव पारिस्थितिक स्थिरता का मूलमंत्र होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण और मानव विकास के बीच संतुलन बनाना समय की आवश्यकता है।
मौके पर केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि प्रभावी वन्यजीव संरक्षण के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ा है, जिससे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन बनाकर दीर्घकालिक समाधान तलाशने होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह उत्कृष्टता केंद्र अधिकारियों और स्थानीय समुदायों की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह पारंपरिक ज्ञान, डेटा प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से शांतिपूर्ण मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देगा।
राष्ट्रीय पोर्टल से मिलेगा बेहतर डेटा और निर्णय में मदद
उद्घाटन के दौरान शुरू किया गया राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल देशभर में संघर्ष की घटनाओं से जुड़े आंकड़ों के प्रबंधन, ज्ञान साझा करने और नीति निर्माण में सहायता करेगा। इस अवसर पर ‘भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन’ शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट श्रृंखला के पहले संस्करण का भी विमोचन किया गया। इसमें देश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति, रुझानों और भविष्य की चुनौतियों का आकलन किया गया है।
कार्यशाला में हाथी, बाघ और तेंदुए के संघर्ष पर चर्चा
उद्घाटन के बाद आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मानव-हाथी संघर्ष, मनुष्य और बाघ-तेंदुए-शेर के बीच संघर्ष तथा संघर्ष कम करने में प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका पर चर्चा की।
कार्यशाला में वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों, शोधकर्ताओं और संरक्षण विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन के लिए नई रणनीतियों और तकनीकी समाधानों पर विचार-विमर्श किया।
सरकार ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र जैव विविधता संरक्षण और मानव जीवन एवं आजीविका की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।













